Trek Of The Year – Bankatiya Glacier Trek
उत्तखण्ड के हज़ारो ट्रेक से आप लोग गुजर चुके होंगे लेकिन आज एक ऐसा ट्रेक में आपको बताने जा रहा हु जो अपने सुना ही नहीं होगा लेकिन इस ट्रेक को उत्तराखंड सरकार ने 2025 में Best Trek Of The Year – Bankatiya Glacier Trek का अवार्ड दिया है। इस ट्रेक की इमेजेज तो आपको गूगल में मिल जाएगी लेकिन इसकी इनफार्मेशन बहोत लिमिटेड है , तो चलिए आज Bankatiya Glacier ट्रेक के बारे में जानते है की आखिर ये ट्रेक है कौन सा और आपको यहाँ क्यों जाना चाहिए
बन्कटिया ग्लेशियर (पिथौरागढ़) उत्तराखंड का एक नया ट्रेकिंग डेस्टिनेशन है, जिसे 2025 में ‘ट्रेक ऑफ द ईयर’ घोषित किया गया है। हालांकि पिथौरागढ़ जिले में कई प्रसिद्ध ग्लेशियर हैं पर बन्कटिया ग्लेशियर हाल के वर्षों में एडवेंचर टूरिज्म के लिए अलग से पहचाना गया है। पिथौरागढ़ क्षेत्र उत्तराखंड के ग्लेशियर बहुल जिलों में सबसे महत्वपूर्ण है; यहां पर मिलम, नामिक, रालम, काली, हीरामणि, पिनौरा, पोटिंग, आदि प्रमुख ग्लेशियर भी मिलते
बन्कटिया ट्रेकिंग रूट रोमांच और प्राकृतिक दृश्यों के लिए लोकप्रिय बन रहा है, जिसमें पारंपरिक गांव, घने जंगल और खुला हिमालयी दृश्य मिलता है , पिथौरागढ़ क्षेत्र उत्तराखंड के ग्लेशियर बहुल जिलों में सबसे महत्वपूर्ण है; यहां पर मिलम, नामिक, रालम, काली, हीरामणि, पिनौरा, पोटिंग, आदि प्रमुख ग्लेशियर भी मिलते हैं
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बन्कटिया ग्लेशियर (पिथौरागढ़) के आसपास कुमाऊं हिमालय क्षेत्र में कई आकर्षक पर्यटन स्थल हैं जो प्राकृतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखते हैं जैसे मुनस्यारी, धारचूला, पिथौरागढ़ टाउन, चौकोरी:, नामिक ग्लेशियर, पाताल भुवनेश्वर:, भीमताल और नैनीताल:, बागेश्वर।
बन्कटिया ग्लेशियर ट्रेक के लिए पूरी सुरक्षा और रोमांच का अनुभव पाने हेतु कुछ खास तैयारियाँ आवश्यक हैं, जो हिमालयी ट्रेकिंग के सामान्य नियमों और स्थानीय तापमान/प्राकृतिक हालात पर निर्भर करती हैं.
क्या अकेले ट्रेकिंग संभव है?
सरकारी दिशानिर्देश: ट्रेक की अनुमति (permit) लेना अनिवार्य है, और उत्तराखंड प्रशासन अधिकांश ग्लेशियर ट्रेक्स के लिए कोई भी दुर्घटना या गुमशुदगी की संभावना देखते हुए अकेले (solo) जाने की बजाय गाइड/समूह के साथ जाने की सलाह देता है,
प्रैक्टिकल जोखिम: पहाड़ी क्षेत्र का मौसम, मार्ग की अनिश्चितता, नेटवर्क न होना, वाइल्डलाइफ, और इमरजेंसी रिस्पॉन्स की कम सुविधा—ये सभी कारण सोलो ट्रेकिंग को जोखिमपूर्ण बनाते हैं।
ट्रेकिंग गाइड की आवश्यकता: अनुभवहीन या पहली ट्रेक करने वालों के लिए, गाइड न केवल स्थानीय मार्ग की जानकारी देता है बल्कि भाषा, संस्कृति, और आपातकाल में सहायता भी करता है।
अगर पर्याप्त ट्रेकिंग अनुभव है, और सरकारी परमिट मिल जाता है तो बन्कटिया ट्रेक अकेले किया जा सकता है, परंतु सुरक्षा और सुविधा की दृष्टि से हमेशा किसी अनुभवी गाइड या समूह के साथ ट्रेकिंग करना ही बेहतर और सुरक्षित है.
Permit kahan se le
बन्कटिया ग्लेशियर ट्रेक के लिए परमिट मुख्यतः पिथौरागढ़ जिले के वन विभाग कार्यालय, SDM ऑफिस (उपजिलाधिकारी कार्यालय), और संबंधित ग्राम पंचायत या पर्यटन विभाग कार्यालय से लिया जाता है
वन विभाग (Forest Department), मुनस्यारी/पिथौरागढ़:
वन क्षेत्र में ट्रेकिंग के लिए फॉरेस्ट ऑफिस से सशुल्क अनुमति अनिवार्य है। यहां आप पासपोर्ट साइज फोटो, आइडेंटिटी प्रूफ (आधार/वोटर/पासपोर्ट) और मेडिकल सर्टिफिकेट देकर प्राप्त कर सकते हैं.
SDM/LIU/ग्राम पंचायत/पर्यटन विभाग:
उच्च क्षेत्र के लिए SDM ऑफिस और ग्राम पंचायत अथवा पर्यटन कार्यालय से भी अनुमति लेनी जरूरी हो सकती है.
ट्रेक कितना लम्बा है और कहाँ से शुरू होता है (Bankatiya Glacier Trek distance)
बन्कटिया ग्लेशियर ट्रेक की कुल लंबाई लगभग 25–30 किलोमीटर (वन-वे) है। यह ट्रेक मुनस्यारी तहसील (पिथौरागढ़ जिला, उत्तराखंड) स्थित बनकटिया बेस कैंप से शुरू होता है, जो तल्ला जोहार क्षेत्र में पड़ता है.
- शुरुआत: मुनस्यारी (बनकटिया बेस कैंप), पिथौरागढ़ जिला.
- लंबाई: लगभग 25–30 किलोमीटर (एक ओर से, बेस कैंप से ग्लेशियर तक).
- समय: ट्रेकिंग में आमतौर पर 4–5 दिन लग सकते हैं, जिसमें रास्ते में सोन, लास्पा जैसे गांव आते हैं.
- मार्ग: बेस कैंप से सोन गांव, फिर अपहिल होकर बनकटिया ग्लेशियर तक जाने का मार्ग है। पूरा रूट जंगलों, हिमालयी घाटियों और पारंपरिक कुमाऊं गांवों से गुज़रता है
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जरूरी तैयारी और सामान
- कपड़े:
- थर्मल इनर (ऊनी इनर वियर), फुल स्लीव शर्ट्स, स्वेटर, विंडप्रूफ जैकेट, रेनकोट/पोंचो
- ऊनी टोपी, मफलर, दस्ताने, मोज़े (दोनों कॉटन व ऊनी)
- ट्रेकिंग ट्राउजर और हल्के कपड़े चलते समय के लिए
- फुटवियर:
- मजबूत ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज़ (हाई एनक्ल), सैंडल, एक्स्ट्रा जुराबें
- स्नो गॉगल्स/सनग्लासेस बर्फ/धूप से आंखों की सुरक्षा के लिए
- गियर व बैग:
- 50-60L का ट्रेकिंग बैग
- वॉटरप्रूफ रेन कवर
- ट्रेकिंग पोल्स, टॉर्च/हेडलैम्प, एक्स्ट्रा बैटरियां
- हाइड्रेशन के लिए पानी की बोतल (टोटल कैरी कैपेसिटी 2-3 लीटर)
- ज़रूरी दवाइयां/फर्स्ट एड किट:
- छाले, कट/घाव के लिए प्राथमिक चिकित्सा
- ऊँचाई के साइड इफेक्ट के लिए ज़रूरी दवाइयों का किट
- पर्सनल नियमित दवाइयाँ
- टॉयलेटरीज़ व पर्सनल हाइजीन:
- पेपर सोप, सैनिटाइज़र, टॉयलेट पेपर, नैपकिन
- टिश्यू पेपर, कचरा बैग (सिंगल यूज प्लास्टिक न रखें)
- खास नोट्स:
- नियमित रूप से पानी पीते रहें—पानी की कमी जल्दी लगती है.
- ट्रेकिंग से पूर्व 1-2 महीने कार्डियो-फिटनेस की प्रैक्टिस बढ़ाएं।
- मौसम के अनुसार सितंबर-अक्टूबर का समय सर्वोत्तम है, जबकि बारिश और बर्फबारी में ट्रेकिंग अवॉइड करें.
- सभी दस्तावेज़, आईडी प्रूफ और अनुमतियां (अगर सरकारी अनुमति की जरूरत हो) साथ रखें।
और भी सुझाव
- ट्रेकिंग ग्रुप या गाइड के साथ जाएँ, पूरी जानकारी रखें।
- रात के विश्राम के लिए हल्का स्लीपिंग बैग/मेट्रेस या टेंट की व्यवस्था रहे।
- पावर बैंक, बेसिक स्नैक्स (ड्राई फ्रूट, चॉकलेट बार, हाई प्रोटीन स्नैक्स) जरुर रखें।
बन्कटिया ग्लेशियर ट्रेक में मौसम की अनिश्चितता, ऊँचाई, और वन्य जीवन की चुनौती होती है — अनुभवी ट्रैवलरों और सरकारी गाइडलाइंस का पालन करना आवश्यक है.बन्कटिया ग्लेशियर ट्रेक के लिए विशेष तैयारी करनी ज़रूरी है, क्योंकि यह एक उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित रोमांचक सफर है। सफलता और सुरक्षा के लिए नीचे दिए गए प्रमुख बिंदुओं का पालन करें:
कपड़े और फुटवियर
- थर्मल इनरवियर, फुल स्लीव शर्ट्स, फ्लीस जैकेट, ऊनी टोपी, दस्तानें, गर्म मोज़े
- जलरोधक विंडचेटर/जैकेट, ट्रेकिंग पैंट
- मजबूत ग्रिप वाले वाटरप्रूफ ट्रेकिंग जूते
- सनग्लासेस (UV प्रोटेक्शन के साथ) और सनस्क्रीन
जरूरी गियर
- 50-60 लीटर का बैकपैक और रेन कवर
- ट्रेकिंग पोल्स, हेडलैम्प/टॉर्च और एक्स्ट्रा बैटरियां
- वॉटर कैरी करने के लिए बोतल (कम से कम 2 लीटर)
व्यक्तिगत मेडिकल-हाइजीन किट
- बेसिक फर्स्ट एड किट, ऊँचाई के हिसाब से दवाइयाँ
- टॉयलेटरीज़ (पेपर सोप, टिश्यू, सेनिटाइजर)
- नियमित दवाइयाँ
बन्कटिया ग्लेशियर ट्रेक के लिए सबसे सुरक्षित और उपयुक्त मौसम
बन्कटिया ग्लेशियर ट्रेक के लिए सबसे सुरक्षित और उपयुक्त मौसम “शरद ऋतु” (सितंबर, अक्टूबर और नवंबर) और “वसंत ऋतु” (मार्च, अप्रैल, मई) माने जाते हैं. इन महीनों में मौसम साफ़, बारिश की संभावना बहुत कम और दृश्यता बेहद शानदार रहती है, दिन में तापमान सुखद (न ज्यादा गरम, न ज्यादा ठंडा) रहता है, जिससे ट्रेकिंग आरामदायक रहती है, बर्फबारी या अत्यधिक वर्षा की आशंका नहीं होती, जिससे ट्रेक मार्ग समतल रहते हैं और भूस्खलन/स्लिप का खतरा कम रहता है.
किन मौसमों से बचें:
March–May (Spring): clear views of Panchachuli और surrounding peaks, बर्फ ऊपर की ridge पर रहती है लेकिन trail manageable रहता है।
May–June (Early Summer): Bankatiya base camp के लिए अभी official operators May–June को भी अच्छा मानते हैं, दिन के समय cool 10–18°C, रात में 0–5°C, lush green valley, लेकिन प्री‑मॉनसून showers के लिए prepared रहना पड़ता है।
September–October (Autumn): sharp visibility, golden meadows, cold nights (sub‑zero possible near glacier), sunset shots शानदार आते हैं, photography और serious trekkers के लिए best phase।stay
Avoid: July–August (heavy monsoon, landslide और road closure risk) + peak winter December–Feb (heavy snow, routes बंद या technical बन जाते हैं)
How To Reach Bankatiya Trek (कैसे पहुंचें बनकटिया बेस कैंप )
रेल/रोड द्वारा प्रमुख प्रवेश बिंदु
- नज़दीकी रेलवे स्टेशन:
- काठगोदाम (Haldwani)
- टनकपुर
इन दोनों स्टेशनों तक दिल्ली-लखनऊ समेत उत्तर भारत के बड़े शहरों से सीधी ट्रेनें मिल जाती हैं।
2. काठगोदाम/टनकपुर से पिथौरागढ़
- काठगोदाम से पिथौरागढ़ की दूरी लगभग 180 किमी है।
- टनकपुर से पिथौरागढ़ की दूरी लगभग 150 किमी।
- इस रूट पर रोडवेज/केएमओयू की बसें और शेयरिंग टैक्सी उपलब्ध हैं।
3. पिथौरागढ़ से मुनस्यारी
- पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से मुनस्यारी लगभग 80 किमी दूर है।
- यहां के लिए भी रेगुलर बस/टैक्सी चलती हैं।
4. मुनस्यारी से बनकटिया बेस कैंप
- मुनस्यारी पहुँचने के बाद आखिरी रोड पॉइंट “तल्ला जोहार” तक टैक्सी/जीप मिल जाती है।
- तल्ला जोहार से सोन गाँव और फिर बनकटिया बेस कैंप तक 5–6 किमी ट्रेकिंग (पैदल सफर) करना होता है।
- काठगोदाम/टनकपुर → पिथौरागढ़ → मुनस्यारी → तल्ला जोहार (रोड) → सोन गाँव → बनकटिया बेस कैंप (ट्रेकिंग)
Trail experience (camper की नज़र से)
- सोन गाँव से ऊपर की तरफ जाते हुए, traditional Johari community के पुराने घर, पत्थर की दीवारें और खेत दिखते हैं — कई trekkers को ये cultural exposure बहुत पसंद आता है, इसलिए फोटो लेने के लिए थोड़ा समय जरूर रखो।
- Bankatiya base camp से sunrise के समय Panchachuli और आसपास की हिमालयी धार साफ दिखती है; clear mornings में light बहुत crisp रहती है, इसलिए ज्यादातर groups 4–5 बजे उठकर पहले light के साथ फोटो शूट plan करते हैं।
- route पर high‑altitude birds और कभी‑कभी Himalayan fox या mountain goats दिख जाते हैं; इसलिए wildlife respect और silence maintain करना भी trekkers को brief करना चाहिए।
b) Camping & stay experience
- 2026 में कुछ local operators ने fixed campsite style set‑up शुरू किया है (shared tents + kitchen tent) जिससे beginners को थोड़ी safety और comfort महसूस होती है; solo tent carry करने की जगह group campsite join करना अधिक practical है।
- रात को temperature गिरने पर बेस कैंप पर wind chill काफी बढ़ जाता है, इसलिए tent के अंदर भी fleece layer + woolen socks + beanie रखना जरूरी है — कई new trekkers यही mistake करते हैं कि दिन के moderate तापमान को देखकर light packing कर लेते हैं।
4. Permits और नियम – 2026 की छोटी‑सी नई reality
तुमने permit वाली जानकारी सही दी है; बस थोड़ा current tone add कर सकते हो:skillshare+1
- Pithoragarh border region में 2026 से inner‑line और security rules थोड़े strict हैं; Dharchula और कुछ पास routes के लिए inner line permit अलग से mandatory है, हालांकि Bankatiya अभी mainstream border zone में नहीं आता, फिर भी admin से latest advisory check करना जरूरी है
- कई district offices अब online या WhatsApp enquiry की सुविधा दे रहे हैं, जिससे trek से पहले ही permit requirement और fee confirm की जा सकती है; ये point तुम blog में एक practical tip के रूप में जोड़ सकते हो (जैसे – “पहले फोन या WhatsApp से forest/SDM office से latest information ज़रूर ले लें”).
5. Safety & current weather‑based टिप्स (2026 context में)
- June 2026 में Munsiyari region में बारिश की संभावना काफी रहती है, इसलिए trail पर स्लिपरी mud sections common हैं; trekking pole और proper high‑ankle shoes सिर्फ recommendation नहीं, practically जरूरी हैं।
- afternoon cloud‑build‑up और showers को देखते हुए, ज्यादातर experienced groups trek start time सुबह 6–7 बजे रखते हैं और major altitude gain पहले half में complete कर लेते हैं; तुम blog में ये time‑planning वाला point add कर सकते हो।
- network coverage कई जगह very weak है, इसलिए offline maps (downloaded ahead) और basic navigation knowledge helpful रहती है; ये बात readers को clearly बताओ ताकि वो सिर्फ Google Maps पर depend न रहें।


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