Manimaai Temple Story
यह मंदिर कोई प्रसिद्द मंदिर नहीं है , न ही शहर के बीचो बीच है लेकिन फिर भी इस छोटे से मंदिर में लोग दूर दूर सेभण्डारे लगाने आते है , आखिर क्यों ?
कभी आप ऋषिकेश से देहरादून गए होंगे तो अपने रस्ते में एक छोटा सा मंदिर जरूर देखा होगा इस मंदिर का नाम है माँ मणिमाई मंदिर और मंदिर की खास बात ये है की यहाँ आपको हमेषा भंडारे लगते दिखते होंगे और आप भी ये जरूर सोचते होंगे की आखिर यहाँ से जब भी गुज़रो भंडारे ही होते दिखते है , क्या आपके दिमाग में ये सवाल आया है की आखिर क्यों , में जनता हु ये सवाल आपके दिमाग में जरुर आया होगा लेकिन आपको अपने गंतव्य तक पहुँचने की इतनी जल्दी होती है की गाड़ी उतर कर आप ये नहीं जान पते की यहाँ भंडारे रोज़ क्यों लगता है , कौन लगता है , और ये छोटा सा मंदिर आखिर है किसका , चलिए आज यही जानते है , लेकिन आपसे एक उम्मीद करता हूँ की अगर जानकारी अगर अछि लगी तो आप वीडियो पर एक लाइकजरूर करोगे और कमेंट में जय माता डी जरूर लिखोगे ,
NH 7 है देहरादून को बर्द्रिनाथ से जोड़ता है और इसी हाईवे पर जब भी ऋषिकेश दे देहरादून या फिर देहरादून से ऋषिकेश आप जाते हो एक जगह पर हमेशा आपको भंडारे लगते दिखते होंगे और आप भी ये सोचते होंगे आखिर यहाँ जब भी जाओ हमेशा यहाँ भडारे क्यों लगे दिखते है , इसकी वजह है सड़क के किनारे बसा ये छोटा सा मणिमाई मंदिर जो माँ काली को समर्पित दिखने में छोटा सा है लेकिन इसकी मान्यताऐ इतनी विशाल है की यहाँ उत्तराखंड में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी भी माथा टेकने आ चुके है , कुछ साल पहले तक यहाँ एक दो लोग ही किसी विशेष दिन भंडारा कराते दिखते थे, लेकिन आज यहाँ भंडारा करने के लिए एडवांस बुकिंग होती है और एक साथ ३ परिवार भंडारा करवा सकते है , और आज की डेट में यहाँ रोज़ यहाँ आपको भंडारा लगता दिखेगा ,
लेकिन यहाँ सबसे यहाँ भंडारा किसने लगवाया क्यों लगवाया ये जानने से पहले हमको ये समझना है की इस छोटे से मंदिर को स्थापित करने की आखिर क्या जरूर पड़ी , दोस्तों इस मंदिर में एक पुजारी जी है जिनका नाम है शिवेंद्र वो बताते है की इस मंदिर का निर्माण उनके पिता द्वारा करवाया गया था आज से लगभग 70 – 80 साल पहले जब यहाँ सड़क निर्माण का कार्य हो रहा था तब सड़क बनने में बहोत अर्चन आ रही थी कभी सड़क बन नहीं पाई , रोज़ना सड़क हादसे में किसी की जान चले जाना , कई दुर्घटनाये होना ये आम बात हो गयी थी , तब शिवेंद्र जी के पिता ने यहाँ वन देवी को प्रसंन्न करने के लिए ये मंदिर का निर्माण करवाया , वन देवी से आज्ञा ली उसके बाद तब जाके आगे का काम शुरू हो पाया , और उसके बाद काम बहोत आसानी से पूरा हुआ , न कभी की का एक्सीडेंट हुआ न कभी किसी की मौत , तो जब भी आप ऋषिकेश से देहरादून गए होंगे और अपने इस मंदिर के आगे सर जुखाया होगा तो अपने मंदिर को नहींबल्कि इन वनो को प्रणाम किया है, अपने उस वन देवी को प्रणाम किया है जो हमेशा से हमारी रक्षा करती आई है , आप कभी किसी ट्रेक में गए होंगे और आपको कोई जंगल पार करना पड़ा होगा तो अपने वहां देवी का मंदिर जरूर देखा होगा और पेड़ो पर चुन्निया और चूडिया भी लड़की देखी होंगी , इसका साक्षात् उदाहरण है , रुद्रनाथ , कार्तिक स्वामी , केदारनाथ, और भी बहोत से मंदिर जहाँ पहने से पहले आपको वन को पार करना पड़ता है जिसकी रक्षा यही वन देवी करती है ,
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, लेकिन सबसे पहले यहाँ भंडारा किसने करवाया इसके पीछे भी एक कहानी है , एक बार की बात है एक ट्रक मालिक का ट्रक इसी जंगल में कही खो जाता है , जिसके बाद वो इन्ही वन देवी के मंदिर में आकर प्रार्थना करता है और वचन डेटा है अगर उसका ट्रक मिल जाता है तो वो यहाँ से जाने वाले यात्रियों के लिए भंडारा आयोजित करवाएगा , कहते है कई दिनों दे जो ट्रक जो नहीं मिल रहा था वो अगले ही शाम इस मंदिर से जाने बाद मिल गया जिसे देख कर उसे बहोत ख़ुशी हुई और वहां उसने भंडारा आयोजित करवाया , और तब से इस मंदिर मान्यता और बाद गयी ,

आज भक्तो की वजह से इस जगह की मान्यताये इतनी बढ़ गयी है की उसकी वजह से लोग इस मंदिर से जुड़ते ही जा रहे है , सड़क के किनारे माँ वन देवी का एक छोटा सा मंदिर आज इतना प्रसद्ध हो गया है की लोग इनके ऊपर आंख बंद करके भरोसा करने लगे है , इसीलिए कहते है दोस्तों जो ताकत आस्था में है वो दुनिया की किसी ताकत में नहीं है इस मंदिर में जाने के लिए आपको ऋषिकेश देहरादून टोल प्लाज़्ज़ा पार करना होता है और टोल मात्र ५०० मीटर की दूरी पर आपको माँ मणिमाई का ये छोटा सा मंदिर आपको दिख जायेगा जहाँ आपको अब हमेषा भंडारा होता दिखाई देगा , तो ध्यान रहे जब भी यहाँ से गुजरो तो वन देवी के आगे हमेशा सर झुका कर चलो ,
